बुनियादी सुधार की जरूरत

उच्च शिक्षा की दिशा बेहतर हो इसके लिए जरूरी है कि छात्रों को छात्रवृत्ति सहित तमाम बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं न कि छात्रों पर प्रशासन अपना फैसला थोपता रहे

Read More

सावित्रीबाई फुले: नारीमुक्ति की अग्रणी योद्धा

सावित्रीबाई फुले रचना समग्र में सावित्रीबाई (1831-1897) की कविताएं, पत्र और भाषण शामिल हैं, जो जाति-प्रथा, अंधविश्वास, और समाज में महिला की गुलामी के खिलाफ तगड़ा विरोध दर्ज कराते हैं.

Read More

शिक्षा ही स्त्री का गहना है : सावित्रीबाई फुले

फुले दम्पत्ति के अलावा 19वीं सदी में शायद कोई ऐसी दूसरी शख्सियतें होगीं, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी वंचित समाज की शिक्षा और उत्थान के लिए लगाया हो। ज़ात-पात, अछूत प्रथा, ब्राह्मणवाद, अंधविश्वास, महिलाओं की दुर्दशा, किसानों और मजदूरों के शोषण के खिलाफ़ आधुनिक भारत में सावित्रीबाई फुले ने प्रखर तरीके से आवाज उठाया। सावित्रीबाई की इस …

Read More

जेएनयू को विश्वविद्यालय से स्कूल बनाने की तैयारी

जेएनयू प्रशासन ने 22 दिसम्बर को एक सर्कुलर जारी किया है, अगर यह लागू होता है तो इससे जेएनयू के आजाद और प्रगतिशील चरित्र पर क्या असर होगा, इसका विश्लेषण कर रहे हैं, अखिलेश कुमार और अभय कुुमार :

Read More

नजीब प्रकरण का एक साल : कहाँ है वह?

उन्होंने विदेश मंत्री और बीजेपी की बड़ी नेता सुषमा स्वराज का भी ज़िक्र किया। “सुना है कि सुषमा स्वराज विदेशों में लोगों को बचाती हैं। मगर जब देश में ही कोई ग़ायब हो जाये तो वह क्यों नहीं कुछ करती हैं”

Read More

तीन तलाक़ पर उग्र राजनीति के ख़तरे

यह कौन सी “मुस्लिम-महिला हितैषी” राजनीति है, जो तलाक़ पर कोर्ट के रोक, समान नागरिक संहिता और राम-मंदिर का निर्माण जैसे अलग-अलग और विवादित मुद्दे को एक-दूसरे का पूरक समझ रही है?

Read More

क्रिकेट की पिच पर जारी नफ़रत का खेल

साम्प्रदायिक विमर्श की तासीर देखिए कि जब तक पाकिस्तान को आप बुरा भला न कहे तब तक आप “सच्चे” देशभक्त नहीं हो सकते हैं. अगर आप मुसलमान हैं तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आप को कुछ ज़्यादा ही तल्ख़ी का इज़हार करना होना.

Read More

सिनेमाघर में राष्ट्रगान : नफरत की राजनीति को बढ़ावा और असल मुद्दों से दूरी

1986 के एक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रगान या देश के लिए आदर के ज़ज्बे को किसी पर थोपा नहीं जा सकता. यह विडम्बना है कि आज सर्वोच्च न्यायालय अपने फैसले को सही साबित करने के लिए संविधान के आर्टिकल 15 (ए) का सहारा ले रहा है, जिसको इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान लाया था.

Read More